Sunday, February 17, 2013

स्त्रीसन्मानाचे पुरस्कर्ते


तारीख: 2/15/2013 12:16:48 PM

$img_title स्वामी विवेकानंदांनी आपल्या जीवनात सदैव भारतीय आदर्शवत स्त्रियांचा सन्मानाने उल्लेख केलेला आहे.भारतीय स्त्रीच्या उज्ज्वलतम चारित्र्याचा आधार म्हणजे,प्रभू श्रीरामचंद्रांची अर्धांगिनी सीतामाता व तत्सम देवीस्वरूप नावाजलेल्या भगिनी होत,असा त्यांचा विश्‍वास होता व अशांचा ते आवर्जून उल्लेख करीत.

Swami Vivekananda and the making of modern India

By | Jan 12, 2013, 06.32 AM IST

Monday, January 7, 2013

डा. मोहन भागवत ने वास्तव में क्या कहा ?

Dear All, 

please sparesome time from your busy schedule and read this carefully. I really feel pity about the thought process of Indian Media the way they twist n turn the "genuine statement to controversial argument with so called "celebrity panelists" on NEWS channels.....
Kindly watch the video on Youtube and listen what Dr. Mohan Bhagawat has said. He has just mentioned that the "Indian Culture" is - "earn and enjoy culture"is making us forget our "Bharatiya Culture" i.e. Basic Culture of respecting women..

Please watch the video..I am confident that you will also feel pity about "Indian Media's Mentality and their so called "celebrity panels"...  


Subject: डा. मोहन भागवत ने वास्तव में क्या कहा ?
डा. मोहन भागवत ने वास्तव में क्या कहा ?
स्रोत : News Bharati Hindi      तारीख: 1/4/2013 6:02:30 PM
मुंबईजनवरी ४ : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डा. मोहन भागवत के कथित वक्तव्य पर मीडिया में बड़ा विवाद चल रहा है । वास्तव में डा. भागवत ने क्या कहा यह जानने का प्रयास न्यूजभारती ने किया । फलस्वरूप जिस कार्यक्रम में डा. भागवत का वह कथित वक्तव्य आया उस कार्यक्रम का वीडियो रिकार्डिंग न्यूजभारती को प्राप्त हुआ । न्यूजभारती अपने पाठकों के लिए उस वीडियो का प्रतिलेख प्रस्तुत कर रहा है । 

शोभायात्रेने शहर झाले विवेकानंदमय, १५० व्या जयंतीवर्षाची झाली सुरुवात



सोलापूर - शहराच्या मध्यवर्ती भागातून रविवारी संध्याकाळी निघालेल्या भव्य शोभायात्रेने सोलापूर विवेकानंदमय झाले. 150 व्या जयंतीवर्षाच्या शुभारंभासाठी सार्ध शती समारोह समितीने आयोजन केले होते. शोभायात्रेचे मागील टोक मंगळवार पेठ पोलिस चौकी येथे तर पुढचे टोक मधला मारुती, माणिक चौक, सोन्या मारुतीमार्गे दत्त चौक इतकी भव्य शोभायात्रा होती. नामदेव चिवडा, नवी पेठ, लकी चौक मार्गे चार पुतळा शोभायात्रा आली.

Saturday, December 29, 2012

विवेक विचार मासिक - डिसेंबर २०१२

नमस्ते,
या आधी तांत्रिक अडचणीमुळे डिसेंबरचा अंक वाचता येत नव्हता, त्रुटी दूर केली आहे.

डिसेंबर २०१२
डिसेंबर २०१२ चा अंक  डिसेंबर २०१२
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मागील अंक 
November 2012
दिवाळी अंक

Sunday, December 23, 2012

मोदींचा विजय आणि दायित्व धर्म

तरुण विजय

$img_titleगुजरातकडे सार्‍या देशाचे लक्ष लागले होते. भारतीय राजकारणात गुजरातमधील निवडणुकांचे निकाल निर्णायक आणि दूरगामी परिणाम करणारे राहणार असल्याने त्याकडे देशातीलच नव्हे, तर विदेशातील सरकारांचेदेखील लक्ष लागले होते. या निवडणुकांच्या निकालांमुळे जशी भारतीय जनता पार्टी आणि नरेंद्र मोदी यांची छाती अभिमानाने फुलली, त्याचप्रमाणे या निकालांमुळे भारताची लोकशाही आणि जन-गण-मनच्या सर्वोच्च स्थानालाही पुन्हा अधोरेखित केले.

Sunday, December 16, 2012

स्वामी विवेकानंद और भारतीय युवा


अक्तूबर २०१२ मे कन्याकुमारी के विवेकान्द केंद्र मुख्यालय - विवेकानंदपुरम में  भारत जागो ! विश्व जगाओ !! महाशिबिर का आयोजन हुआ। इस शिबिर मे ६७६ युवा संमिलीत हुये. इस महाशिबीर मे दिये गये भाषानोंसे याह आलेख प्रस्तुत ही....

 सम्पूर्ण भारत परिभ्रमण करके स्वामी विवेकानंद कन्याकुमारी आये। कन्याकुमारी में उन्होंने माँ पार्वती के चरणों में प्रार्थना की और अपने जीवन के उद्देश का साक्षात्कार कर लिया। माँ का कार्य याने भारत माता का कार्य इस बात को उन्होंने समझ लिया। सम्पूर्ण विश्व को जगाने के लिए उन्होंने माँ पार्वती से शक्ति प्राप्त की। उन्हें माँ पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उसी प्रेरणा से सागर में स्थित श्रीपाद शिलापर 3 दिन और 3 रात्रि तक अखंड ध्यान किया। अपने ध्यान में उन्होंने अखंड भारत देखा। देश की स्थिति समझ ली। भारतवासीयोंके उद्धार के लिए एक व्यापक योजना बनाई। स्वामीजी कहते है, भारत के पतन का कारण भारत का असंगठित जीवन है। विश्व के अन्य लोगोंकी तुलना में हम अत्यंत हीन जीवन व्यतीत कर रहे है। हम आलसी बन गए है। हम घोर तामस से ग्रस्त है। व्यर्थ विवादोंमे उलझ गये  है। इसी बात का फायदा विदेशियों ने उठाया। उन्होंने हमें गुलाम बनाकर बुरी तरह लुटा। 
जननायको ने प्रेरणा ली ऐसे निराशाजनक स्थिति से भारतीय समाज को अध्यात्मिक चेतना से स्वामीजी ने जागृत किया। विश्व सम्मेलन से सफल होकर लौटने के बाद स्वामीजीने तुरंत राष्ट्र को संगठित करना प्रारंभ किया। युवकों को एकत्र करने के लिए कोलम्बो से अल्मोरा तक युवा शक्ति को मार्गदर्शन किया। 1905 में बंगाल के विभाजन के विरुद्ध लढने के लिए कई युवकों ने स्वामीजी से प्रेरणा ली। लो। तिलक, सुभाष बोस, सरदार पटेल, राजेंद्र प्रसाद ऐसे जननायको ने स्वामीजी से प्रेरणा ली।समर्पण की तयारी 
इतिहास के इस बात को समझकर हमें नि:स्वार्थ भाव से देश के लिए काम करना होगा। समर्पित जीवन की प्रेरणा स्वामीजी के विचारोंसे लेनी होगी। आज देश के लिए युवा शक्ति की अत्यंत आवश्यकता है। इसलिए विवेकानंद केंद्र से जुड़कर हमें मनुष्य निर्माण व राष्ट्र निर्माण के लिए काम करना होगा। सेवाव्रती, शिक्षार्थी, जीवनव्रती के रूप में हमें समय दान देना होगा। यह समय की मांग है की विवेकानंद केंद्र से जुडो और अपना समय दो। हमें प्रत्येक घर में सनातन जीवन मूल्य पहुँचाना है। कार्यकर्ता निर्माण करना है। इसलिए भारतमाता की चरणों मे सम्पूर्ण समर्पण की तयारी रखिये।
 केवल भारत में ही नहीं विश्व के अन्य देश तथा व्यक्तियों ने भी स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा ग्रहण की। जापान के प्रधान मंत्री भारत आये तो उन्होंने कहा हमने जो प्रगति की है उसके पीछे स्वामी विवेकानंद की ही प्रेरणा है। कारण जापान के द्रष्टा महापुरुष तेनसिन ओकेकुरा ने स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा ली थी।

 त्याग और सेवा का अमर सन्देश स्वामी विवेकानंद ने भारत परिभ्रमण के दौरान धर्म की अवनति, टूटते जीवनमूल्य, गरीबी, निर्धनता, अज्ञान आदि बातें देखि। दूसरी ओर उन्होंने देखा की इन स्थितियों में भी भारत की धार्मिक और आध्यात्मिक धरोहर सशक्त है। सांस्कृतिक भावधारा अक्षुण्ण है। विश्व को परिवार समजने की भावना काफी प्रबल है। सम्पूर्ण विश्व में एकात्मता की भावना को जन्म देनेवाली यह संस्कृति महानतम है। इसी महानतम संस्कृति ने सदियों से विश्व को त्याग और सेवा का अमर सन्देश दिया। 11 सितम्बर 1893 के बाद स्वामी विवेकानंद अमरीका में  गणमान्य व्यक्ति बन गए। अमरिका में उन्होंने वैभव सम्पन्नता को देखा। सुख सुविधा होते हुए भी अपने देशवासियोंके स्मरणमात्र से वे रातभर रोते रहे। राष्ट्रप्रेम के कारण ही उन्होंने भारत में आकर युवकों का संघटन बनाया। युवको को प्रेरणा दी।अमर सन्देश भारत जागो विश्व जगाओ, यह स्वामी विवेकानंद का अमर सन्देश है। यह सन्देश याने उनके कार्य का निचोड़ है। आज भारत सोया हुआ है। तामस से पीड़ित है। जो विश्व को जगा सकता है, वही सो रहा है। इसलिए हमें स्वामी विवेकानन्द के विचारों को अच्छी तरह आत्मसात करना होगा। भोगवाद को नष्ट करने का तत्त्वज्ञान विश्व में आज केवल भारत के पास ही है। हमारा देश आज भी जीवित है क्यों की हमारे पूर्वजों ने हमारे समाज की व्यवस्था अद्वैत तत्वज्ञान पर खडी की है। आज हमें यह समझाना होगा की हमारे संस्कृति में ऐसा क्या है की जिसका हम त्याग कभी भी न करे और ऐसा क्या है की जिसमे हम समय के साथ परिवर्तन कर सकते है। यह सब छोड़कर आज प्रत्येक व्यक्ति 'क्रायींग बेबीज' बन गए है। जब तक हम निर्दोष नहीं होंगे तब तक हमारे प्रगति का मार्ग प्रशस्त नहीं होगा। युवाओं की आवश्यकताइसलिए स्वामीजी कहते है, मुझे ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो अपने समाज पर प्रेम करे और अपने ह्रदय को विशाल तथा व्यापक बनाये। समाज की समस्त समस्याओं को समझते हुए अपना समय दान देगा। हमारे पूर्वजों ने अनेक आक्रमणों और कष्टों को सहकर इस पवित्र आध्यात्मिक संस्कृति का जतन किया। हमारे मन में अपने पवित्र संस्कृति के प्रति सन्मान और स्वाभिमान जागृत करे। इसलिए आओ, हम अपने धरोहर को समझते हुए स्वयं जगकर विश्व को जगाएं। सार्ध शती समारोह आज भारत अनेक गुप्त आक्रमणों का सामना कर रहा है। इस अवस्था में सभी स्थरो पर देश वासियों की नैतिकता गिरती जा रही है। आज हमें इन स्थितियों से उभरने के लिए अपने अंतर आत्मा को जागृत करते हुए सम्पूर्ण देश में भव्य दिव्य रूप में सार्ध शती समारोह के उपक्रमों को ले जाना है। इसलिए स्वार्थ त्याग कर राष्ट्र का पुनर्निमाण हमें करना है। इस हेतु गांव गांव, शहर शहर पहुँचाने के लिए पांच आयामों के माध्यम से हम कार्य करेंगे। देश के युवाओं को सही दिशा देने के लिए युवा शक्ति आयाम के माध्यम से हमें काम करना है। अग्रेंजों को देश से निकलने के लिए इस देश में यदि क्रांतिकारियों का निर्माण हो सकता है तो देश के नकारात्मकता व दुर्बलता को दूर करने के लिए निस्वार्थी युवा कार्यकर्ता क्यों नहीं।
संकलन - सिद्धराम 

संपादक, विवेक विचार

Saturday, December 15, 2012

ISLAM Christen missionaries IN JAPAN

BRIG HEMANT MAHAJAN NATIONAL SECURITY: ISLAM Christen missionaries IN JAPAN: NEVER KNEW THIS JAPAN They are indeed a very evolved race.   Something we Hindus sadly lack in spite of having an equally great, or s...

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siddharam patil photo

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