दैनिक भास्कर ऑनलाईन वृत्त / लखनऊ.
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे बीजेपी और आरएसएस पर भले ही आतंक का ट्रेनिंग कैंप चलाने का आरोप लगाते हैं लेकिन भारत सरकार के पास इसे साबित करने के लिए कोई सुबूत नहीं है। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार यह भी बताने में विफल रही कि देश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की कुल कितनी वारदातें हुई हैं। ये सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई सूचना में सामने आया है। आरटीआई कार्यकर्ता उर्वशी शर्मा को दी गई जानकारी में केंद्र सरकार यह भी बताने में विफल रही कि देश में घुसपैठ की कुल कितनी घटनाएं हुईं और विद्रोह कहां-कहां हुआ।
केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे बीजेपी और आरएसएस पर भले ही आतंक का ट्रेनिंग कैंप चलाने का आरोप लगाते हैं लेकिन भारत सरकार के पास इसे साबित करने के लिए कोई सुबूत नहीं है। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार यह भी बताने में विफल रही कि देश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की कुल कितनी वारदातें हुई हैं। ये सूचना का अधिकार कानून के तहत मांगी गई सूचना में सामने आया है। आरटीआई कार्यकर्ता उर्वशी शर्मा को दी गई जानकारी में केंद्र सरकार यह भी बताने में विफल रही कि देश में घुसपैठ की कुल कितनी घटनाएं हुईं और विद्रोह कहां-कहां हुआ।





पेशवाईचा
अस्त १८१८ साली झाला आणि महाराष्ट्रात अव्वल इंग्रजी शासनाचा कालखंड सुरू
झाला. १८३२ सालापासून महाराष्ट्रात प्रबोधनपर्वास सुरुवात झाली, असे
मानण्यात येते. आपण पारतंत्र्यात का गेलो? त्यासाठी आपले सामाजिक दोष कसे
कारणीभूत झाले आहेत? आपल्या धर्मात काही मूलगामी दोष निर्माण झाले आहेत का?
याचे चिंतन आणि मनन सुरू झाले. बाळशास्त्री जांभेकर, न्यायमूर्ती रानडे,
आगरकर आणि महात्मा जोतिराव फुले आदी थोर पुरुषांची नावे या प्रबोधनपर्वाशी
जोडली गेलेली आहेत. यांपैकी महात्मा जोतिराव फुले हे महाराष्ट्रातील आणि
देशातीलही बहुजन समाजातील पहिले समाजक्रांतिकारक आहेत.